साहित्य

मूर्ख है जो नांदा हैं नहीं इरफानी है

सुभाष हेमबाबू 

मूर्ख है जो नांदा हैं नहीं इरफानी है

शांति ओ सादगी से कटती जिंदगानी है।

 

पानी का मुतबादिल कुछ और नहीं

पानी से ही महफूज जिंदगानी है।

 

पानी को बर्बाद करोगे तो भोगोगे ,

जान कर बूझ करते लोग क्यों नादानी है।

 

मौत के पंजो से कौन बचा है जग में

मौत तो एक दिन सबकी आनी है।

 

हंस कर जो पल गुजरे वही जिंदगानी है

हंस मुख फर्द की दुनिया दीवानी है।

 

सुभाष हेमबाबू

महोबा

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