
दुनिया का महान पुरुष था , जिसका शौर्य निराला था ,कवच में वजन बहत्तर था ,भाले में वजन इक्यासी था ।
पवन वेग से चलता चेतक ,जब युद्ध क्षेत्र में आता था ,मुगलों की सेना फिर ,वह हड़कंप मचाता था ।
देख आठ फुटा कद महाराणा का , दुश्मन भागा करते थे ,राणा के आगे अकबर और सेना ,थर -2 कॉपा करते थे ।
जब जंगल में रहा वर्षों तक ,घास की रोटी खाई थी ,पर मुगलों के आगे उसने ,गर्दन नहीं झुकाई थी ।
नहीं झुका मरते दम तक ,वह सूर्यवंश का सूरज था ।वह भारत का स्वाभिमान था ,वह भारत का दीपक था ||
जब डेरा डाला मुगलों ने ,पावन हल्दी घाटी में ,जाग उठग वह महान पुरुष ,
जो जन्मा कुंभलगढ़ की माटी में।
वह भारत का गौरव था ,वह देश का एक तपोबल था ,मुगलों को दे खुली छूट ,वह सिंह का शावक था ।
अकबर को थी धूल चटाई ,अपने ही बलबूते से ,ठोकर मार दी समझौते को ,उसने अपने जूते से ।
मुगलों का वह हर पल- हर दम,जीवन हरने वाला था ,एक बार में ही दुश्मन के ,दो टुकड़े करने वाला था ।
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश
स्वरचित एवं मौलिक✍️




