
वो सूना -सूना सा आँगन,
जो कभी चहकता था,
उसके कुहूकने और फुदकने से,
फिर वो आँगन शांत सा हो जाता है.,
नित्य का कर्म था उसका,
धीरे धीरे समय बीतता गया,
वो चिड़िया बड़ी हुई पँख पसारे,
नीड़ से बाहर निकली,
और एक चीड़े से हार गई,
और वो प्यारी सी चिड़िया को उड़ा ले गया,
और वो आँगन सूना हो गया सदा के लिए ||
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब
22-06-2026




