साहित्य

अहम और क्या कहेगे लोग ने 

डॉ रामशंकर

सैकड़ों प्रतिभाओं को उठने से पहले खत्म कर दिया ज के समय की जरूरत है धर्य और निष्ठा के साथ आत्मा विश्वास जो युवा पीढ़ी में दूर दूर तक नहीं दिखाई देती है कुछ ने थोड़ा बहुत किया नह की बड़े होने का भ्रम पाल जीने लगता हैं और उसका यही अहम उसे भविष्य में आगे जाना से बाधक हो जाता है

सैकड़ों प्रतिभाओं को घर परिवार के या अन्य साथी मित्र जो खुद जीवन में कुछ नहीं कर पाये वो अक्सर उन अपनों को उनकी प्रतिभाओं को उठने से पहले खत्म करने में लगे रहते हैं क्या कहेगे लोग आदि आदि सैकड़ों बैराग आलाप करते हुए उन्हें भयभीत कर देते हैं

मुझे याद है बच्चपन से लिखता आया है पिता जी अक्सर मुझे रोकते रहे पिता थे चिंता स्वाभाविक है बोलते रामू तू मत कर कुछ दुनियां अच्छी नहीं है लोग जलेंगे तुझे परेशान करेंगे पर में बच्चपन से जिद्दी था जो चाहता करता हूं हार मुझे बहुत पीड़ा देती हैं

मैं उन्हें कहता लोगों के जलने से ईर्ष्या करने के डर से में कुछ नहीं करूं यह नहीं होगा, पिता जी चुप तो हो जाते पर हमेशा डरे रहते थे

आज हजारों लोग जलन ओर इरा लिए हैं जो सोशल मीडिया पर सबसे पहले मेरी पोस्ट देखते है उनकी यह जलन और ईर्ष्या मेरे उपलब्धि बन गई, किसी से नहीं मिलता हूं जानता हूं सब को समय को इसलिए सदा ही कर्म करने में विश्वास करता हूं मुझ से कोई जुड़ा तो सैकड़ों लोग उसे दूर करने में लगे रहते हैं किसी न किसी तरह

पर देखता हूं जीवन में यदि नीयत साफ़ है मन आत्मा साफ़ है तो परम् सत्य है ईश्वर आशीष सदा आप के पास साथ है जो प्रतिदिन महसूस करता हूं और यही मेरी ऊर्जा है ताकत है ओर जिंदगी का सुख सुकून है

खैर जितना लिखा जाय आज की दुनियां की बैराग आलाप को राग द्वेष जलन ओर ईर्ष्या पर कम होगा

हम तो मस्त है मस्त रहते हुए जी बहुत बहुत कुछ परम शक्ति ईश्वर आशीष सदा बना रहा

वंदन उन सभी को जो सदा साथ है और साथ देते हुए आशीष दे ऊर्जा प्रदान करते हैं वंदनीय है ऐसे विरले लोग देवत्व इंसान जो ईश्वर कृपा से नसीब होता हैं

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

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