
अंजली’ काग़ज़ी नहीं करनी l
ऐसी भी शाइरी नहीं करनी l
हौसला साथ कब तलक देगा,
कब तलक ख़ुदकुशी नहीं करनी l
मैं किसी बात पर नहीं हूं चुप,
बस मुझे बात ही नहीं करनी l
आ के सूरज ये पूछ ले मुझसे,
कब तलक रोशनी नहीं करनी l
आप इतने उदास बैठे है,
आपसे दोस्ती नहीं करनी l
दिल के अंदर उतर गया कोई l
ज़ख़्म चुपके से भर गया कोई l
याद आई थी कल ग़ज़ल बन के,
डाइरी में उतर गया कोई l
अपनी ठंडक भरी मसीहाई,
बिन छुए दिल में भर गया कोई l
जिस के आने से साँस आई थी,
उस के जाने से मर गया कोई l
जन्नतों तक रहूँगा साथ तिरे,
कर के वा’दा मुकर गया कोई l
हाए पहली उड़ान से पहले,
इश्क़ के पर कतर गया कोई l
मुद्दतों तक जम्अ हुई थी घुटन,
इत्तीफ़ाक़न बिखर गया कोई l
ज़ैद के ज़ेहन में रहा मौला,
ढूँडने दर-ब-दर गया कोई l
आप हैरान थे रवानी पर l
करके आई हूं रक्स पानी पर l
अब वो बचपन को याद करते हैं,
वो जो इतराते थे जवानी पर l
कोई पकड़ा नहीं गया अब तक,
किसने खींचा था तीर रानी पर l
एक दूजे के हो नहीं सकते,
हाय! अफसोस इस कहानी पर l
धर के बैठी हूं पांव जन्नत में,
इस उदासी की मेहरबानी पर l
इक दफ़ा तुम से वही वादा करेंगे l
कुछ तुम्हारे वास्ते अच्छा करेंगे l
एक बिल्डिंग में रहेंगे यार दोनो,
आते जाते हम तुझे देखा करेंगे l
हमने देखा था तुम्हारी आंख में जो,
हाँ वही सपना कभी पूरा करेंगे l
दोस्त तू अच्छा बुरा सब कुछ है मेरा,
फिर बता तुझसे बिछड़कर क्या करेंगे?
जब तू हो जाये किसी का और मैं भी,
फिर कभी इस बात पर झगड़ा करेंगे l
मेरी आंखों में ग़ौर से देखो,
एक नाज़ुक-ख़याल रक्खा है l
छू के देखो ये मोम जैसा है,
आज दिल खोल-खाल रक्खा है l
रूह के आबले नहीं जाते,
ज़ख्म भी बा-कमाल रक्खा है l
टूटकर यूं बिखर गए है हम,
चुभ न जाए कहीं उठाने से l
ज़हर लगते है मशवरे सबको,
हम भी संभले है चोट खाने से l
दुश्मनी क्यूं निभा रहा है तू ?
प्यार से मात क्यूं नहीं देता ?
तू मिरी बात काट देता है,
तू मिरा साथ क्यूं नहीं देता ?
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घर में किसने ये रोशनी की है ?
कौन है चांद के घराने से ?
किसी से अब नहीं बनती, करें क्या?
नहीं बनती, नहीं बनती, मरें क्या?
कौन कहता है चुप ही रहती है ?
आके तस्वीर की सुने कोई l
ऐसे बैठे है आस में उनकी,
जैसे दरवेश बैठ जाते है l
इश्क़ करने के बाद समझे हैं,
मौत आसान है मुहब्बत में l
कोई घर पक्का बनाकर तोड़ना l
हाय! इक रिश्ता निभाकर तोड़ना l
ये सरापा बदन उदासी का,
रोने लगता है मुस्कुराने से l
हौसला मरने का नहीं मुझमें,
एक उम्मीद हादसे की है l
*अंजलि सिंह, दिल्ली*




