साहित्य

उनका हिस्सा

जयचन्द प्रजापति

 

चमचमाती गाड़ियां

चमचमाते लोग

उनके बड़े-बड़े महल

उनके वे रसूख

एक भीड

जो उनके साथ खड़ी है

उनके पास

जो धनबल,बाहुबल है

 

सड़क पर

रात जो गुजार रहे हैं

 

उन रसूखदारों से

कोई मतलब नहीं है

 

बस उनकी

एक पीड़ा है

उनके हिस्से पर

रसूखदारों का मजमा लगा है

जयचन्द प्रजापति ‘जय’

प्रयागराज

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