साहित्य

प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक 

डॉ गीता पांडेय

बुरे कर्म को छोड़कर, रखिए शुद्ध विचार।

द्वेष भाव को भूलकर, करिए सद् व्यवहार।

धर्म सनातन की प्रथा, मानवता का पाठ,

जीवन का शुभ मंत्र यह, करो सभी स्वीकार।।

 

दुर्गुण मन से दूर कर,भरें ज्ञान का सार।

सबके प्रति अनुराग रख, देते शिष्य सँवार।

गुरुवर करते जब कृपा, तिमिर भागता दूर,

बढ़े जगत में नाम है, उर भरता संस्कार।।

 

लोभ मोह ईर्ष्या करे,भरे हृदय अभिमान।

समय चक्र गतिशील है, भटक रहा इंसान।

क्षणभंगुर इस देह से, झूठ कपट हो दूर,

करो कृपा गुरुवर सदा,बने जगत पहचान।।

 

छवि लगती अभिराम है, सभी गुणों के धाम।

सत्य धर्म संस्कार से,जग में कीर्ति ललाम।

जीने की सारी कला, सिखलाते गुरुदेव,

गुरुवर को गीता करे, सत्-सत् बार प्रणाम।।

 

डॉ गीता पांडेय अपराजिता

सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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