साहित्य

कलयुग की भीड़ का चरित्र 

डॉ रामशंकर

चौका दिया

एक मासूम के साथ

तीस लोगों द्वारा

दुष्कर्म

सचमुच आज को

बेहद बेहद भी विचारणीय है

पर जानता हूं

कही कुछ नहीं होगा

केवल देख सुन

दुःखद है शब्दों के उच्चारण के सिवा, नफ़रत तो पहले ही

दिल और दिमाग में

आज से है

सालों से यह दुनियां रास नहीं है

कहीं धर्म के नाम से

छला जा रहा है

कहीं बेहिसाब छल कपट

तो कहीं ईश्वर दरबार में ही

लुट, विश्वास किस पर करें

यह है आज जिसकी

आज भी करोड़ो लोगों

सराहना करते हुए दिखाई देते हैं

शायद उन्हें इन सब से कोई लेना देना नहीं

वो अपने सुख सुकून में

इन सब बातों को व्यर्थ समय खराब

नहीं करना चाहते हैं

सब कुछ बिक गया है

कहीं सच्चाई नहीं

कहीं अमानवीय सोच और चिंतन नही

रिश्ते स्वार्थ पर टिके हैं

अपनापन, प्यार और हमदर्दी

जैसे शब्द बकवास लगते है

कलयुग है साहब

कितना लिखे

किस किस को

नंगा करे

जब सब कपड़ों में नंगे है

वहां किसी सहानुभूति की बात करना,

मानवीयता की बात करना

बैमानी लगती हैं

बस मन हल्का किया

सदा की तरह

और मुझ जैसे नाचीज़

फकीर क्या कर सकता

जहां शासन ,प्रशासन ,

आदि आदि सैकड़ों

लगे हो देश को सही दिशा मार्ग देने में उन्नति और विकास में

आदि आदि सैकड़ों खूब सूरत

सुख सुकून देती बातों को समेटे

इस देश के, दुनियां के

कलयुग को प्रणाम करने के सिवा

कुछ नहीं कर सकता

ज्यादा लिखना

ज्यादा बोलना

परम् सत्य कहना

खूब के पैरों पर

कुल्हाडी चलना है

 

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!