
वो सुकून भी बहुत खास हैं
इस सुकून ।इन एक चांदनी मेरे साथ हैं
खड़ा हूँ में बालकनी में अपनी
देख रहा हु चाँद की चांदनी
जो मुझे लुभा रही है
सुकून का एहसास जता रही है
जब मैने उस चाँद को देखा
तो पता चला सब इसके नहीं
चाँदनी के दीवाने हैं
चाँदनी में इसकी
सब चाँद को भूल जा रहे हैं
ये भी अच्छा हैं
पर असली सुकून
तो उस चाँद में हैं
जिसमें लाखों दाग़ है
पर असली सुकून
तो उस चाँद में हैं
जिसकी लाखों को आश हैं
चाँदनी मानो चमक चमक कर कह रही हैं
की आ दो पल बैठ मेरे साथ
महसूस कर
वो नमी जो में दे रही हूँ
चाँदनी में वो सितारे
जिनको हम निहारे
बहुत मनमोहक दृश्य हैं
ये तो सुकून की बात हैं
किसी को निहारने में सुकून हैं
किसी को जताने में सुकून हैं
कोई देख कर खुश हो जाता हैं
कई सब सह कर चुप हो जाता हैं
यही हैं सुकून
दिल का सुकून
जो ज़ुबां पर कभी भी आता हैं
जब सब सुकून के लिए तरसते हैं
में छत पर जा कर
चाँद को निहारती हूँ
भी मेरा सुकून हैं
जो हर कोई समझ नहीं पाएगा
इस सुकून को पाने में
इंसान , इंसान को बेच खायेगा
जाने की सुकून की
लालच करने वालों को
सुकून नज़र नहीं आयेगा
चाँद कह रहा था
एक दिन मुझसे
की मुझमे रोशनी हैं
इसलिए मुझे तुम चाहते हो
मैंने कहा कि आज नहीं
पर कभी देखा मुझे
में अमावस्या के दिन भी
तेरा इंतजार करने
तुझे निहारने छत पर आती हूँ
क्योंकि मुझे सुकून उस चाँदनी से नहीं
मुझे सुकून हैं
है चाँद तुझसे
क्योंकि तेरे बिना तो
चांदनी भी दस्तक देती नहीं
सुनने में कितना अजीब हैं
की मैने चाँद से बात की
पर मैं थी सुकून में
इसलिए ये संभव हैं
की मैने की बात चाँद से
तुम जैस रहे होंगे पढ़ कर
पर ये सब था मुमकिन
रात की चाँदनी का सुकून है ये
जो बहुत लुभा रहा हैं।।




