
बरखा की पहली बूँद गिरी मन में मधुर सितार बजे
तेरी यादों की भीनी खुशबू हर धड़कन के द्वार सजे।
बादल ने जब बाँहें फैलाईं धरती ने श्रृंगार किया
तेरे संग भीगने की चाहत ने जीवन को गुलज़ार किया।
एक ही छतरी दो मुस्काने चुपके-चुपके बात करें
भीगी पलकों सपनों के मोती प्रेम के दीपक रात भर धरें।
रिमझिम-रिमझिम गाए सावन, कोयल मीठे राग सुनाए,
तेरी हँसी की मधुर तरंगें मेरे मन को पास बुलाए।
माटी की सोंधी-सोंधी खुशबू जैसे तेरा स्नेह मिला,
सूने मन के हर आँगन में प्रेम का मधुवन फिर खिला।
हाथों में जब हाथ हो तेरा क्या मौसम क्या दूरी है
तेरे संग हर बूँद लगे जैसे, ईश्वर की मंजूरी है।
भीगी राहें, भीगे सपने, भीगी हर इक शाम रहे,
तेरी यादों की गरमाहट से, मेरा हर अरमान बहे।
बारिश केवल पानी नहीं, यह प्रेम का पावन उत्सव है,
हर बूँद में तेरा ही चेहरा, हर धड़कन में तेरा स्वर है।
चलो आज फिर भीग चलें हम, सारे शिकवे भूल चलें,
प्रेम की रंगीन छतरी लेकर, जीवन के हर फूल चुनें।
जब तक सावन गाता रहेगा, यह दिल तेरा नाम कहे,
रिमझिम-रिमझिम प्रेम हमारा, युगों-युगों तक यूँ ही दीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




