
कहा गीता में “कर्म किये जा
ना कर फल की इच्छा ”
होगे कर्म जैसे
फल मिलेगा वैसा।
दिये सब अंग शरीर के
और अच्छा सा मस्तिष्क,
प्रयोग करो दिमाग़ को
न मिले, तकलीफ किसी को।
जिस पल साँस ले लिये
वो पल है तुम्हारा,
नहीं आयी अगली साँस
बिस्तर से भी नीचे उतारा।
नाम लिखा बोर्ड पर
रह जायेगा,
जीव इस संसार से
ना जाने कहाँ जायेगा।
खाली हाथ आये
है खाली हाथ जाना,
याद कर लो सभी
आखिरी छटा है देखना।
बोल नहीं सकते तुम
पर अच्छा बुरा जानोगे,
साथ उस समय केवल
अच्छे काम ही जायेंगे।
रह जायेंगे अल्फाज़ धरा पर
अच्छे कर्म कर लो,
साँस है अनमोल
एक-एक साँस का मोल समझ ले।
छांट-छांट के हर पल
किया अपना मानव ने,
छोटी बड़ी ली कोई चीज
रखी पसंद स्वयं ने।
आखिरी छटा पर मानव
या हो कोई प्राणी,
नहीं वश में है जिंदगी
एक-एक पल का हिसाब है जिंदगी।
डॉ. प्रभा जैन “श्री ”
देहरादून




