साहित्य

कर्म-पथ पर चलकर हम

डाँ सुमन मेहरोत्रा

कर्म-पथ पर चलकर हम, छू लें नव आकाश।

श्रम की ज्योति से जगमग हो, जीवन का विश्वास।

 

काँटों से मत हार मानो, फूल स्वयं खिल जाएँ,

दृढ़ संकल्पों के आगे, पर्वत भी झुक जाएँ।

 

आँधी चाहे राह रोके, दीप नहीं बुझने दो,

मन में आशा की सरिता को, हर पल यूँ बहने दो।

 

पसीने की हर एक बूँद, मोती बन मुस्काए,

मेहनत का मधुरिम फल, जीवन में सुख लाए।

 

सत्य, धैर्य और साहस को, अपना सदा सहारा,

इनके बल पर जग में होता, हर सपना उजियारा।

 

हार मिले तो सीख समझकर, फिर से कदम बढ़ाएँ,

विजय-पताका एक दिवस हम, नभ में स्वयं लहराएँ।

 

अपने कर्मों से ही लिखें, भाग्य नया हर बार,

यही सफलता का है पथ, यही सच्चा आधार।

 

आओ मिलकर प्रण दोहराएँ, रुके न अपना प्रयास,

कर्म-पथ पर चलकर हम, छू लें नव आकाश।

 

स्वरचित

डाँ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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