
गंगा समान निर्मल
ज्ञान का पाठ पढ़ाने वाली,
अच्छाई बुराई में अंतर
माँ तुम ही हो बताने वाली।
तुम शब्द हो माँ
तुम ही अर्थ हो,
जिंदगी मिली तुमसे
तुम ही प्रथम गुरु हो।
जन्म दिया किया पालन
रूप दिया, बनी तुम्हारी परछाई,
माँ शारदे का रुप तुम्हारा
मेरा जीवन खुशहाल किया।
लक्ष्मी रूप में तुम विराजमान
घर नौकरी संभालती हो,
पवित्रता में तुम सीता
सावित्री माँ देवी का अंश हो।
सारे त्यौहार तुमसे है
जन-जन की कल्याणी हो,
बना रहे आशीर्वाद तुम्हारा
मेरी जीवन बाती हो।
स्वरचित
डॉ. प्रभा जैन “श्री ”
देहरादून




