
जगन्नाथ का धाम स्थित है पुरी ,
बने विश्वकर्मा कला की धुरी।
करें हैं सभी आपकी आरती ,
तुम्हें पूजती है सदा भारती।।
सुभद्रा जगन्नाथ प्रभु हैं यहाँ,
चलें पूजने भक्त सब हैं वहाँ।
नवाएँ सभी शीश प्रभु सामने,
करें प्रार्थना प्रेम श्रद्धा सने।।
यहाँ कृष्ण छवि में जगन्नाथ हैं,
रथों पै करें दर्श प्रभु नाथ हैं।
उन्हें भक्त रथ पै निकासी करें,
खुशी से सभी गोद खाली भरें।।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई।



