
मरहम वो बन हर दर्द की तासीर खीचना।
मजलूम बेबसों पे न शमशीर खींचना।
चूके न निशाना ये बस चाह रख मगर,
पहले से जो लगा है दिल पे तीर खींचना.
मुझमे ही रह रहा है मगर मुझसे रूठकर,
आएगा सामने तो एक नजीर खीचना।
तुझको भुला न पाऊँगी ऐ मुफलिसी मेरी,
मेरै पास रहे एक तेरी तस्वीर खींचना।
तेरी राह मेँ चराग़ एक मैं भी रखूंगी,
बस चांदनी तक मेरी तकदीर खींचना।
मन में बसा ली मूरत घनश्याम की जब से,
कहता है दिल बस उनकी ही तस्वीर खींचना।
संगीता शिवपुरी




