
हर हर महादेव का मंत्र,
जब गूंज उठता है संसार में।
कण-कण में शिवजी दिखते हैं,
खुश होते भक्तों के प्यार में।
नहीं मांगते सोना और चांदी,
बेलपत्र से ही उन्हें प्यार है।
सच्चे मन से भक्त करें आराधना,
शिव ही उनका संसार है।
शिव जटाओं से बहती गंगा,
भक्तों के पाप धो जाती है।
डमरू की मधुर ध्वनि जैसे,
हर पीड़ा को दूर कर जाती है।
भस्म विभूषित शिव शंकर भोलेनाथ,
मस्तक पर शीतल चंद्र रहता है।
गले में नाग की माला लपेटे,
विष को गले में धारण करता है।
हर हर महादेव यह केवल मंत्र नहीं,
यह जीवन का दिव्य आधार है।
जो शिव तत्व को अपने भीतर भर ले,
उसकी नैया भवसागर से पार है।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।




