
सावन आया भोले के द्वार,
बूँद-बूँद में भक्ति की धार।
घटा घनेरी नाचे अम्बर में,
डमरू बजे कैलाश के पार।
नीलकंठ पर बेलपत्र चढ़े,
गंगा जल से अभिषेक हो।
भक्तों की झोली भर जाए,
“हर-हर महादेव” का जयकारा हो।
त्रिशूलधारी ध्यान में लीन,
जटाओं से बहे पावन नीर।
साँपों का हार गले में सोहे,
माथे का चंदा मन मोहे।
सावन और शिव का रिश्ता,
जैसे प्रीत पुरानी है।
भोले एक लोटा जल से,
खुश होकर वरदानी है।
आओ झूम के गाएँ सब,
“बम-बम भोले” का नारा।
सावन में शिव कृपा बरसे,
हो जाए बेड़ा पार हमारा।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज




