
रजत जयंती आई है ।
रिश्तेदार महामगन हैं
लख-लख देते बधाई हैं।।
सुख और दु:ख पचा पचाकर
पच्चीस वर्ष बीत गए हैं ।
परमपिता की अनुकंपा है
विवाह का जुआ जीत गए हैं।।
कौन जीता है? बंटू वाणी ।
तो आज, वह शुभ बेला है
एक दूजे को रहे समर्पित
इन वर्षों में तन- मन से ।
रियाऔरआख्या को पाकर के
प्रतिदिन खिलते रहे सुमन से।।
ईश्वर पितरों की बड़ी कृपा है
बंधु- बांधवों की शुभेच्छा ।
परिलक्षित उत्सव की आभा
परिपूरित हुई सबकी इच्छा।।
उत्तम स्वास्थ्य सुदीर्घजीवन
बंटू वाणी को सदा मिले ।
मनोवांछना पूरी होवें
सबका प्यार दुलार मिले ।
सफल संपदाएं धरती की
बढ़ती आएं पास तुम्हारे ।
जीवन की बढ़ती नैय्या के
चरण चूम लें स्वयं किनारे।।
बहती रहे धरा पर जब तक
गंगा और यमुना की धारा ।
अमर रहे सौभाग्य तुम्हारा
जैसे अंबर में ध्रुव तारा ।।
शिव पार्वती की तरह सदा
अमर रहे दोनों का प्यार ।
पूरी हों मनोकामना
खुशियां पाओ हर दिन अपार।।
बहुत-बहुत शुभ आशीर्वाद और अनंत शुभकामनाएं तुम दोनों को हम दोनों की ओर से❤️🎉 -रेखा उमेश
स्वरचित: डॉ.रेखा सक्सेना


