साहित्य

बंटू वाणी की शादी की  

डॉ.रेखा सक्सेना

रजत जयंती आई है ।

रिश्तेदार महामगन हैं

लख-लख देते बधाई हैं।।

 

सुख और दु:ख पचा पचाकर

पच्चीस वर्ष बीत गए हैं ।

परमपिता की अनुकंपा है

विवाह का जुआ जीत गए हैं।।

 

कौन जीता है? बंटू वाणी ।

तो आज, वह शुभ बेला है

 

एक दूजे को रहे समर्पित

इन वर्षों में तन- मन से ।

रियाऔरआख्या को पाकर के

प्रतिदिन खिलते रहे सुमन से।।

 

ईश्वर पितरों की बड़ी कृपा है

बंधु- बांधवों की शुभेच्छा ।

परिलक्षित उत्सव की आभा

परिपूरित हुई सबकी इच्छा।।

 

उत्तम स्वास्थ्य सुदीर्घजीवन

बंटू वाणी को सदा मिले ।

मनोवांछना पूरी होवें

सबका प्यार दुलार मिले ।

 

सफल संपदाएं धरती की

बढ़ती आएं पास तुम्हारे ।

जीवन की बढ़ती नैय्या के

चरण चूम लें स्वयं किनारे।।

 

बहती रहे धरा पर जब तक

गंगा और यमुना की धारा ।

अमर रहे सौभाग्य तुम्हारा

जैसे अंबर में ध्रुव तारा ।।

 

शिव पार्वती की तरह सदा

अमर रहे दोनों का प्यार ।

पूरी हों मनोकामना

खुशियां पाओ हर दिन अपार।।

 

बहुत-बहुत शुभ आशीर्वाद और अनंत शुभकामनाएं तुम दोनों को हम दोनों की ओर से❤️🎉 -रेखा उमेश

 

स्वरचित: डॉ.रेखा सक्सेना

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!