
जुलाई सन 1927 को जन्मे मंगल पांडे जी, क्रांतिवीर महान।
नगवा ,बलिया जिला -उत्तर प्रदेश जन्म स्थान ।
मंगल पांडे जी को नमन, अर्पित श्रद्धा सम्मान ।
पिता दिवाकर पांडे -माता अभय रानी के पुत्र मंगल पांडे की है अमर पहचान।
1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के, अग्रदूत मंगल पांडे जी ने रचा कीर्तिमान।
34 वीं बंगाल नेटिव बटालियन में, 22 वर्ष आयु में बने सिपाही ,दिया योगदान ।
राष्ट्र हित और राष्ट्र की सेवा था ,मंगल पांडे जी का अरमान ।
बिट्रिश सेना की एंडफील्ड 53 राइफल के कारतूस टोपी में ,गाय- सूअर चर्बी प्रयोग का हुआ उन्हें भान।
मुंह से खुलते थे कारतूस, जिससे होगा हिंदू -मुस्लिम धर्मावलंबियो का अपमान ।
29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में ,कारतूस उपयोग विरोध में ,मंगल पांडे ने छेड़ा अभियान ।
कर्नल बाब और ह्यूशन पुलिस पर मंगल पांडे ने गोली चला दी, बगावत का किया ऐलान।
बंदी बनाए गए मंगल पांडे जी ,मार्शल कोर्ट ने फांसी सजा का सुनाया फरमान ।
18 अप्रैल 1857 को होगी फांसी की सजा, यह सुनकर स्वाधीनता के लिए, भारत में आया तूफान ।
संपूर्ण भारत में क्रांति भड़कने के डर से ,8 अप्रैल 1857 को ,पहले ही दे दी मंगल पांडे जी को फांसी, रोया सारा हिंदुस्तान ।
क्रांतिकारी मंगल पांडे जी अमर हैं- अमर रहेंगे ,अर्पित श्रद्धा सुमन सम्मान।
5 अक्टूबर 1984 को उनके स्मृति में, डाक टिकट हुआ जारी, अमर रहेगा उनका बलिदान ।
जय हो -जय हो मंगल पांडे जी- प्रथम क्रांतिकारी स्वाधीनता संग्राम के ,तुम्हें अर्पित है श्रद्धासुमन सम्मान।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित मौलिक है।




