साहित्य

कविता

पंडित मुल्क राज

जीवन पथ पर चलना होगा*

 

 

जीवन पथ पर सजक प्रहरी बनकर तुमको चलना है,

कदम कदम पर संकट आए धीरज कभी न खोना है।

 

राहों के अंगारों पर भी हंस कर आगे बढ़ना है,

आंखों में ले स्वप्न सुनहरे हर पल आगे बढ़ना है।

 

काले बादल छठ जाएंगे नया सवेरा लाना है,

कांटो भरी रहो पर भी, तुमको फूल खिलाना है।

 

थकना मत तुम रुकना मत तुम, आगे कदम बढ़ाना है,

तूफानों से लड़ कर तुमको अपना भाग्य जगाना है।

 

सत्य धर्म और न्याय मार्ग पर, अडिग हमेशा रहना है,

मन में भरकर अचल भरोसा आगे बढ़ते रहना है।

 

लड़ना होगा हर मुश्किल से, झुकना कभी न सीखना है,

सजग प्रहरी बन कर तुमको, जीवन पथ पर चलना है।

 

मंजिल की खातिर “आकाश” भय ओर डर से लड़ना है,

सजग प्रहरी बनकर तुमको जीवन पथ पर चलना है।

 

पंडित मुल्क राज “आकाश”

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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