साहित्य

ईश सम गुरु छवि छंद

डॉ मंजु गुप्ता

नव – नव बताके ,रचना सिखाके

कमियाँ बताते ,लेखक बनाते ।

 

पढ़ना – पढ़ाना ,दिनभर कराना

लिखना – लिखाना ,माहिर कराना ।

 

गुरु है निराला ,है ज्ञान माला

भगवान होता ,रास्ता दिखाता ।

 

कविता सिखाते,गलती बताते

मेहनत कराते ,आगे बढ़ाते ।

 

छवि छंद साजे ,सब हैं विराजे

आशीष पाएँ,गुरु हैं सिखाएँ।

 

डॉ मंजु गुप्ता

वाशी , नवी मुंबई

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