
नव – नव बताके ,रचना सिखाके
कमियाँ बताते ,लेखक बनाते ।
पढ़ना – पढ़ाना ,दिनभर कराना
लिखना – लिखाना ,माहिर कराना ।
गुरु है निराला ,है ज्ञान माला
भगवान होता ,रास्ता दिखाता ।
कविता सिखाते,गलती बताते
मेहनत कराते ,आगे बढ़ाते ।
छवि छंद साजे ,सब हैं विराजे
आशीष पाएँ,गुरु हैं सिखाएँ।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई




