साहित्य

गुरु पूर्णिमा स्पेशल  साधक  

नीलम अग्रवाल

साधक गुरु से सीखते, रोज नया इक पाठ ।

गुरु बतलाते छंद में, गण होते हैं आठ ।।

गण होते हैं आठ, शुभ होते इसमें चार ।

चार अशुभ के नाम, बतलाते हैं गुरु सार ।।

साधक गुरु से पा रहे, चौपाई का ज्ञान ।

छंद युक्त रचना यहां, रोला मुक्तक जान ।।

रोला मुक्तक जान,रोज दिव्यालय आकर ।

मात्रा का रख ध्यान, सिखाते गुरु लिखवाकर ।।

साधक गुरु का मान कर, ऊंचा इनका स्थान ।

इनके चरणों बैठ कर, करना विद्या पान ।।

करना विद्या पान, गुरु से लेना दीक्षा ।

दूर हुआ अज्ञान, यहां जब पाई शिक्षा ।।

सीखे नीलम रोज, यहां पर बनकर याचक ।

गुरु देते जो कार्य, पूर्ण करती बन साधक ।।

रत्न कहे सच बात, ज्ञान में होती ताकत ।

इक दूजे से रोज, प्रेरणा लेते साधक ।।

 

नीलम अग्रवाल” रत्न” बैंगलोर

🙏🙏

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