
साधक गुरु से सीखते, रोज नया इक पाठ ।
गुरु बतलाते छंद में, गण होते हैं आठ ।।
गण होते हैं आठ, शुभ होते इसमें चार ।
चार अशुभ के नाम, बतलाते हैं गुरु सार ।।
साधक गुरु से पा रहे, चौपाई का ज्ञान ।
छंद युक्त रचना यहां, रोला मुक्तक जान ।।
रोला मुक्तक जान,रोज दिव्यालय आकर ।
मात्रा का रख ध्यान, सिखाते गुरु लिखवाकर ।।
साधक गुरु का मान कर, ऊंचा इनका स्थान ।
इनके चरणों बैठ कर, करना विद्या पान ।।
करना विद्या पान, गुरु से लेना दीक्षा ।
दूर हुआ अज्ञान, यहां जब पाई शिक्षा ।।
सीखे नीलम रोज, यहां पर बनकर याचक ।
गुरु देते जो कार्य, पूर्ण करती बन साधक ।।
रत्न कहे सच बात, ज्ञान में होती ताकत ।
इक दूजे से रोज, प्रेरणा लेते साधक ।।
नीलम अग्रवाल” रत्न” बैंगलोर
🙏🙏




