
फूलों से भवन सजाया,तुझको मनाएँ माँ
आ जाओ चंद्रघण्टा ,तेरी आरती गाएँ माँ
आ……
तू गौरवर्णी है माँ ,तेरी सिंह सवारी है,
दस हाथों में आयुध हैं,तेरी छवि न्यारी है
तू मन को शांत करे है संतुष्टि दिलाए माँ
आ…….
तेरे शीश पै चंदा है मां,चंद्रघंटा कहाती है,
मन के दुर्भावों से मां , तू हमको बचाती है
इस भवसागर से मैया,हमें पार लगाए मांँ
आ……..
तेरे गले पुष्प की माला,तेरी सिंह सवारी है
तू सबको शक्ति देती , तेरी मूरत प्यारी है
हे मांँ तू बड़ी दयालू ,सबको अपनाए मांँ
आ…………
आशा बिसारिया चंदौसी




