जब पड़ी पावस की
प्रथम बूँद
धरा कर बैठी तरुण
नवयौवना सृंगार
मन मस्त हुआ
देख पावस फुहार
धूल गए वृक्षो के पात पात
नन्हे पौधे ले अंकुरण भाव
बाल सुलभ
शिशु लीला अपार
धानी चूनर ओढ़ धरा
चमके कैसी बूंदों की ले थाह
इठलाती आनन्दित
जब चली बयार
छाई कैसी घनघोर घटा
दे रही धरा को
अनगिनत उपहार
दादुर ,कोयल,मोर,चकोर
नाच रहे बन चित चोर
रवि छिप कर बैठा
करता विश्राम
बादल गरजे विजली चमके
श्यामल वर्ण में ज्यो
दतिया चमके
तड़तड़ छनछन,पट पट
धुन बजती ले संगीत अपार
विरहन तरसे परदेसी पिया
व्याकुल मन से
खड़ी ताके द्वार
हर्षित जन मानस और संसार
जब पड़ी
पावस की बूंद बन फुहार
स्वरचित
मीना तिवारी




