
कागज़ की इस सादी शीट पर,
शब्दों का आकाश सजा है।
भावनाओं के बहते झरने में,
हर एक पल ख़ास सजा है।
ख़्वाबों के ताने-बाने बुनकर,
दिल की बात जुबां पर आती।
अल्फ़ाज़ों के इस मेले में,
सच्चाई ख़ुद राह बनाती।
सूरज की पहली किरण सी,
उम्मीदों की अलख जगाएं।
चलो मिलकर इस जीवन में,हम एक नई कविता सजाएं।
-डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद,गुजरात।




