साहित्य

दुश्मन ना आँख उठाने पाये

सुन्दर लाल मेहरानियाँ

दुश्मन ना आँख उठाने पाये,वतन जान से प्यारा है।

संगीन पे रखके सर सो जाये,तन मन देश पे वारा है।।

जब याद सताये अपनो,की बेचैन बहुत हो जाते हैं,
लगे सुहानी डाँट पिता की, लोरी में खो जाते हैं,
बहना के संग आँख मिचौनी,आँगन का बडा दुलारा है।
दुश्मन ना आँख उठाने पाये,वतन जान से प्यारा है।।

सजा थाल दीपक प्रियवर,चंदन का तिलक लगाती।
आँखों में अश्क छलक आएँ, सौभाग्य पे वो इतराती।।
बनु शहीद की विधवा चाहे, हर सब तुझ पे वारा है ।
दुश्मन ना आँख उठाने पाये,वतन जान से प्यारा है।।

मासूम बडे ही चेहरे थे,आँगन की वो अठखेलियाँ।
घर जल्दी आ जाना पापा, हैं दर्द भरी वो पहेलियाँ।
बीत गया उनका बचपन,अँगुली का ना मिला सहारा है।
दुश्मन ना आँख उठाने पाये,वतन जान से प्यारा है।।

दुश्मन सर पे चढ़ आये तो,बाजी वो जाँ की लगाते ।
कर जाते वतन के नाम जवानी,लिपट तिरंगे में आते।
आँसू सबको दे जाते हैं,शहादत का हसीं नजारा है।
दुश्मन ना आँख उठाने पाये,वतन जान से प्यारा है।।

दुश्मन ना आँख उठाने पाये,वतन जान से प्यारा है।
संगीन पे रखके सर सो जायें,तन मन देश पे वारा है।।
सुन्दर लाल मेहरानियाँ

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