
2 अगस्त मित्रता दिवस आया, आत्मीय प्रेम से मनाया ।
2 अगस्त ही नहीं मित्रता दिवस, हमने जीवन में 365 दिन मनाया।
उच्च -नीच भाव से परे होती है मित्रता ,यह संदेश सुनाया ।
रंग ,जाति, धर्म ,उम्र, दौलत से परे होती, मित्रता में अटूट प्रेम है समाया।
मित्रों ने हीं हर दुख -सुख में निस्वार्थ, साथ निभाया ।
सच्ची मित्रता प्रभु श्री कृष्ण ,सुदामा की, कोई आज तक भूल न पाया ।
प्रभु श्री कृष्ण की सखी द्रोपदी से मित्रता, इज्जत बचाई ,चीर बढ़ाया।
मित्रता भाव ने हीं ,जीवन संघर्ष में साथ देकर ,जीत का परचम लहराया ।
औपचारिकता से परे ,मित्रता का अनुपम रिश्ता प्रभु ने बनाया।
प्रभु राम के मित्र निषाद राज एवं वानर राज सुग्रीव ने एक दूजे का साथ निभाया।
महाभारत युध्द ने दुर्योधन और दानवीर कर्ण की मित्रता का अटूट रिश्ता दिखाया।
अर्जुन, श्री कृष्ण की मित्रता, महाभारत युद्ध में सारथी बन रथ श्री कृष्ण ने चलाया।
मित्र मिलन पर मन मुस्कुराता ,जैसे मित्र खुशियों की गठरी लाया।
मित्र की मिश्री घुली ,मधुर बोली सुन_अरे मैं हूँ न, मित्र ने गले लगाया।
मित्र मिलाप से दुख के बादल छटे, मन को सूरज -सा चमकाया।
गलती करने पर मित्र ने डाट खुराक पिलाई ,समस्या को सुलझाया ।
अरे मनमीत आया, मित्रता का रिश्ता सदैव निभाया, मन हर्षाया।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित और मौलिक है।




