
सखा वही है परम् हितैषी, जो सखा के मन को पढ़ता है।
सत्य के आगे सदा समर्पित, प्रतिकार झूठ का करता है।।
सुख में साथ खड़ा मुस्काता, दुःख में बन संबल रहता है।
जीवन की दुर्गम राहों में, साहस बनकर संग चलता है।।
भटके यदि पग सत्य-पथों से, उचित मार्ग पर धरता है।
सखा वही है परम् हितैषी, जो सखा के मन को पढ़ता है।।
लोभ-मोह के घने कुहासे, जिसको कभी न भरमाते हैं।
हित की बातें कहने में वह, तनिक नहीं घबराते हैं।।
कटु वाणी में भी कल्याणों का, मधुरस बनकर झरता है।
सखा वही है परम् हितैषी, जो सखा के मन को पढ़ता है।।
जब-जब मन अवसाद समेटे, वह आशा-दीप जलाता है।
हार नहीं मानो जीवन में, बस यह संदेश सुनाता है।।
पतन पथों पर बढ़ते पग को,रोक सही पथ धरता है।
सखा वही है परम् हितैषी, जो सखा के मन को पढ़ता है।।
कृष्ण-सुदामा की मैत्री-सा, जिसका निर्मल व्यवहार रहे।
राम-सखा निषादराज-सा, मन भीतर पावन प्यार रहे।।
निस्वार्थ प्रेम और सद्भावों से, जीवन-उपवन सजता है।
सखा वही है परम् हितैषी, जो सखा के मन को पढ़ता है।।
धन-वैभव से नहीं परखता, भावों का सम्मान करे।
संकट में आगे बढ़कर शिव, रिश्तों की पहचान करे।।
ऐसा मित्र धरा पर सचमुच, ईश्वर का वर लगता है।
सखा वही है परम् हितैषी, जो सखा के मन को पढ़ता है।।
सत्य के आगे सदा समर्पित, प्रतिकार झूठ का करता है…
कविराज डाॅ०-शिवकुमार सिंह ‘शिव’
दुसौंती रायबरेली-२२९३०६




