हरियाणा

लघु कथा : कुछ पलों की,जिंदगी,,,,,

डॉ रामशंकर चंचल

उम्र के 68 साल पूरे होने वाले हैं, याद नहीं इन सालो में कभी भी , जिंदगी जियो हूं, केवल तेरे साथ गुजारे वो चंद पलों के अलावा, रूह
किसी भी व्यक्ति के जीवन में इससे बड़ा दर्द क्या होगा कि इतनी बड़ी उम्र में भी वो मात्र चंद पलों के अलावा कभी जीया नहीं, इससे बड़ी यातना क्या होगी कि वह हंसा तो तेरे साथ वो रोया तो तेरे साथ कुछ सुख सुकून पाया तो तेरे साथ, आदर और सम्मान पाया तो तेरे पास, किसी ने उसे समझा तो तुम हो मात्र, किसी ने उसका ख्याल रखा तो तुम हो , बैठ कर सुखद अनुभव किया इतने बड़े जीवन में तो वो तुम हो , और आज उन्हीं चंद पलों के सहारे , जी रहा हूं जो जीवन्त रखें सक्रिय रखें ऊर्जा ताकत देते हुए जिंदा रखें हैं और में लगा हूं और के सुख सुकून के लिए , लगा हूं अपने शहर की उपेक्षा का जवाब देते हुए , लगा हूं लुप्त हो रही मानवीयता को कुछ ही सही बचा सकूं इस तरह पूरी निष्ठा से संपूर्ण समर्पण से यह सोच कि उस ईश्वर ने इस कार्य के लिए हो जन्म दिया और
तुम्हारे रूप में साक्षात अहसास कराया जो परम सत्य है केवल हम तुम जानते हैं
खैर लगा हूं लगा रहूंगा जब तक वह ईश्वर चाहेगा सोचता हूं उसने कुछ दिया या नहीं दिया नहीं जानता पर इतनी जरूर दिया कि कोई एक ही सही जो मुझे अच्छे से समझ सका और मेरी साधना और तपस्या को मेरे दिल और पवित्र आत्मा को आदर दे मुझे मेरे होने का अहसास कराया कि में जो कर रहा हूं साक्षात ईश्वर आदेश से उसके साथ और सुकून से
प्रणाम करता हूं ईश्वर शक्ति रूह को उसके अथाह प्यार आशीष को जो मात्र चंद पलों के साथ में इतने लंबे जीवन की पीड़ा को हर मुझे अपने होने का अहसास कराए जिंदा रखें सक्रिय रखें है
वंदन उन चंद पलों को सत् सत् वंदन उस ईश्वर रूह को जो कभी हर पल साथ थी और आज भी मुझे मेरे कर्म पथ पर दस्तक देती मुझे हर पल साथ होने का अहसास कराती हुई जिंदा रखें हैं
उन चंद पलों को सत् सत् वंदन जब जीवन पूंजी को शेष जीवन के अद्भुत ऊर्जा ताकत को बंटोर रहा था यह जीवन जो अहसास आज हुआ कि ऐसा भी होता है कि मात्र चंद पलों में इंसान इतना प्यार दुलार आदर और सम्मान पा जाती हैं कि शेष जीवन उसी के सहारे , यादों को समेटे जिंदा रखें बहुत बहुत ही सुख सुकून से गुजार देता हूं

प्रणाम जिंदगी तुझे सत् सत् प्रणाम
तूने जो दिया बहुत दिया मैने कभी शिकायत नहीं कि आज भी बस याद कर रहा हूं तुझे और सुखद अहसास कर रहा हूं तू जैसे भी मिली इस नाचीज़ फकीर के सौभाग्य है जिंदगी

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!