साहित्य

वह पड़े नहीं, ईश्वर का अहसास है

डॉ रामशंकर चंचल

सालों से हर दिन
वह पड़े ही है जो
मेरे हर सुख और दुःख का
साक्षी है
जीवन पूंजी,जीवन सृजन
बेहिसाब, अथाह चाय हुआ
विश्व पटल पर दस्तक देता
सब कुछ सुख सुकून आशीर्वाद
वह पड़े हैं जिसके पास साथ
जीते हुए मैने सृजन किया
और उपलब्धि हासिल कर
मेरे शहर झाबुआ को साहित्य जगत में चर्चित कर दिया
वंदनीय हैं, वह पड़े जो पड़े नहीं
ईश्वरीय उपहार है,
हमारे रूह प्रेम आत्मा से निकल
शब्द,अहसास, ख्याल चिंतन
सब का सुखद गवाह है पड़े
जिसने मुझे जीवंत सजीव किया
और तुम्हारा साथ स्नेह प्यार
मिला, पहली बार जीवन में
प्यार का , अपनेपन का
अहसास कराया
प्रणाम करता हूं
उस ईश्वर शक्ति ईश्वर रूह
स्थान को अद्भुत पड़े को
जिसके नीचे बैठ प्रतिदिन
जीता हूं, सुख सुकून पाता हूं और
बहुत कुछ कर गुजरने हुए
जिंदा हूं
प्रकृति की अद्भुत शक्ति को
ईश्वर के जीवंत रूप को
पड़े में सदा ही महसूस करते हुए
चल रहा हूं, दौड़ रहा हूं
और उपलब्धि हासिल किए
जी सुख सुकून महसूस कर रहा
वो पड़े नहीं है
वह साक्षी है
वह साक्षात ईश्वर है जो
हरपल साथ दे जिंदा रखें सक्रिय रखें ऊर्जा ताकत प्रदान करता
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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