
गाॅंव भर खुशियाॅं ।
शहर भर ग़म ।
मुस्कानों का –
खीसा ख़ाली ।
नीर भरी –
नैनों की थाली ।
गाॅंव भर मरहम ।
शहर भर ज़ख़्म ।
पतझड़ों के –
सजे हैं मेले ।
मधुमास के –
नित नए खेले ।
गाॅंव भर उजास ।
शहर भर तम ।
शहर से घर –
हुए फ़रार ।
मकानों में –
आए न क़रार ।
गाॅंव भर रहम ।
शहर भर ज़ुल्म ।
दिल के रिश्ते –
हुए कमज़ोर ।
गाॅंठ ही गाॅंठ –
लगीं हर ओर ।
गाॅंव भर निश्चल –
शहर भर छद्म ।
+ मक्सी जिला शाजापुर (म.प्र.)
**************************




