साहित्य

नारी सम्मान के लिए लिखा गया गीत 

पंडित पुष्पराज धीमान भुलक्कड़ 

युगो युगो से नारी,
रही पुरुषों पर भारी,
दुनिया में हम ही ना होते,
जो ना होती महतारी

जब यह अपनी पर आए,
तोअच्छे-अच्छे झुक जाए
नारी के बिना घर नहीं बनता
जग के काम सब रुक जाए
रूप अनेक लेकर दुनिया में आई
बेटी, पत्नी तो कभी मां कहलाई
मां से ही सृष्टि का सृजन
मां की है महिमा न्यारी
युगो युगो से नारी..,…..,,………,….,..

इसकी शक्ति से सभी देवता घबराते
अपने से पहले,नारी का नाम लगाते
गौरी शंकर लक्ष्मी नारायण या सीताराम
देखोअपने से पहले जोड़ा नारी का नाम
शक्ति स्वरूपा को सब नमन करें
खुद त्रिलोकी हो चाहे हो अवतारी
युगो युगो से नारी…….,.,…………..,,….

जब व्रत नवरात्रि के आए
कितने रूपों में यह पूजी जाए
पत्नी बनकर आ जाती अपने घर
करती अपना सब कुछ न्योछावर
बनता है फिर घर परिवार
बनती है कितनी रिश्तेदारी
युगो युगो से नारी..,…,.,….,,…,,,.,….,….

देखो कैसा यह संजोग बना है
महिलाओं के लिए आयोग बना है
यहां जो भी नारी का दिल दुखाते हैं
देखो  कितना कानूनी कष्ट उठाते हैं
साथ खड़ी हो जाती है इसके
भारत की यह जनता सारी
युगो युगो से नारी ……..,………………..

युगो युगो से नारी ,
रही है पुरुषों पर भारी
दुनिया में हम ना होते
जो ना होती महतारी

पंडित पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार उत्तराखंड

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