साहित्य

उस को इतना सफ़ल

कनक

उस को इतना सफ़ल व तेज़ बनाया हमने
ख्वाबों में भी ना कभी भी सताया हमने।।//१//

सबको प्यार उल्फ़त बांटा फ़िर पड़ा घाटा
नफा नुकसान किसी को ना सिखाया हमने।।//२//

जिन्दगी में सबका सहयोग विश्वास रक्खा
फ़िर भी यारों मंज़िल पर कुछ पाया हमने।।//३//

जीवन भर मेहनत की लगन औ परिश्रम से
इस दुनियां में कोई ना समझाया हमने।।//४//

सब को दिल जिगर से लगाया हमेशा यार
राहगीरों को भोजन भी खिलाया हमने।।//५//

वो चेहरा अब भोला

वो चेहरा अब भोला नज़र नहीं आता
अंधेरे में कभी शोला नज़र नहीं आता।।//१//

करे कपट छुप धोका नज़र नहीं आता
रहे लपट ख़ुद छैला नज़र नहीं आता।।//२//

जले हुए ग़म पे रौशनी नहीं दिखती
जो कोहरा हो तो औला नज़र नहीं आता।।//३//

कभी भी दिल से वो करता नहीं भला रहता
मुझे कभी न वो सच्चा नज़र नहीं आता।।//४//

वो जिन्दगी का मसीहा बना रहा जी भर
मुझे कभी ख़ुद चहरा नज़र नहीं आता।।//५//

कनक

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