राजस्थान

उत्तर प्रदेश की साहित्यकार नीलम राकेश सम्मानित

भव्य साहित्य सम्मान समारोह का आयोजन

लालसोट (राजस्थान)। अनुराग सेवा संस्थान के तत्वावधान में 20 दिसंबर 2025 को राजस्थान के लालसोट शहर स्थित अशोक शर्मा राजकीय माध्यमिक इंटर कॉलेज में एक भव्य साहित्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक चेतना को समर्पित रहा, जिसमें देशभर से आए साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति देखने को मिली।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान के माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़ी रहे। उन्होंने अपने करकमलों से देश के 11 राज्यों से पधारे कुल 31 साहित्यकारों को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया। समारोह में साहित्य जगत के अनेक प्रतिष्ठित रचनाकार, शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं साहित्यप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार श्रीमती नीलम राकेश को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए “कीर्तिशेष श्री लालाराम उपाध्याय स्मृति अनुराग साहित्य सम्मान–2025” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें उनकी चर्चित बाल साहित्य कृति ‘फूलों की बगिया’ के लिए प्रदान किया गया। माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़ी ने स्वयं उन्हें यह सम्मान प्रदान कर उनके साहित्यिक अवदान की सराहना की।
सम्मान प्रदान करते हुए राज्यपाल महोदय ने अपने संबोधन में कहा कि बाल साहित्य समाज की भावी पीढ़ी के संस्कार निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चों के लिए लिखी गई रचनाएँ केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास और नैतिक मूल्यों के संवर्धन का आधार होती हैं। उन्होंने श्रीमती नीलम राकेश की कृति ‘फूलों की बगिया’ को बालमन के अनुकूल, शिक्षाप्रद एवं संस्कारोन्मुख बताते हुए उनके रचनात्मक प्रयासों की प्रशंसा की।
कार्यक्रम के आयोजक अनुराग सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि इस सम्मान समारोह का उद्देश्य देशभर के साहित्यकारों को प्रोत्साहित करना तथा साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना का प्रसार करना है। समारोह में सम्मानित साहित्यकारों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बताया।
समारोह के अंत में आयोजकों द्वारा माननीय राज्यपाल सहित सभी अतिथियों, सम्मानित साहित्यकारों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन साहित्यिक एकता, राष्ट्रीय समरसता और रचनात्मक संवाद का एक प्रेरणादायी मंच सिद्ध हुआ।

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