जीवन की पगडंडी पर
भगवान तूही सहारा है
दुख-सुख में साथ देता है
राह में आए संकट को
तुमही दूर करते हो नाथ
जीवन जीने के लिए
अन्नपूर्णा की जरूरत को
आपके बाद किसान ही
दिन-रात मेहनत करके
धरती रौंद रौंद कर
अपना खून पसीना बहा कर
मानव का पेट भरता है
वह आपके बाद पालनहार है
सच तो यही है
भगवान तेरे बाद जीवन संभालने वाला
जय-जवान जय-किसान है
आओ आज किसान दिवस पर
सभी किसानों को वंदन करें
ईश्वर के बाद वाले किसान को
ईश्वर का दूसरा रूप मान प्रणाम करें
विनोद कुमार सीताराम दुबे शिक्षक भांडुप मुंबई महाराष्ट्र
संस्थापक इन्द्रजीत पुस्तकालय सीताराम ग्रामीण साहित्य परिषद सामवन्ती ग्राम महिला विकास मंडल जुडपुर मड़ियाहूं जौनपुर उत्तर प्रदेश



