
पिता कृष्ण बिहारी के सुपुत्र,
कवि हृदय सम्राट् बने उत्कृष्ट,
भावों के चंदन से महके अक्षर,
अटल विचारक कहे भारत रत्न,
ओजस्वी वाणी से हर लेते थे मन,
प्रखर वक्ता,शांत मन के वो सुमन,
राजनीति के भीष्म पितामह महान,
भारत के सूर्य सम उदित हुए गगन,
मेरी इक्यावन कविताओं के कथन,
जीवन सार मानो उच्चरित हो दर्शन,
क्या खोया क्या पाया पंक्ति प्रबल,
भारतीय संस्कृति का किया वर्णन,
सहज व्यक्तित्व, सरल हृदय मुखिया,
जीवन का प्रथम सिद्वांत भारत सेवा,
जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान
आधुनिकता, परम्परा का मेल यहीं देखा,
स्वप्नों के पुष्प अर्पित करे कवि हृदय,
पुण्य चरित्र, निश्छल मुस्कान, मर्यादा,
लोकप्रिय हर क्षेत्र में , बहुआयामी मनुज,
गौरान्वित है भारत धरा तुमसे सर्वदा,
ग्वालियर की धरती बनी अखिल तीर्थ,
कृष्ण बिहारी कुटी से प्रज्ज्वलित प्रदीप
पोखरण से सुनी थी विश्व ने भारत हुकांर,
शांति दूत आप धन्य- धन्य हे!भारत वीर,
युद्ध भूमि हो या शांति की जमीन हो,
राजनीति सेवा या कवि, तुम प्रवीण हो,
कारगिल विजय से रखा जवानों का मान,
युगों तक गौरव गाथा हृदय आसीन हो,
रश्मि मृदुलिका
देहरादून उत्तराखण्ड




