
काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रणेता,
मालवीय महामना कहलाए।
तप, त्याग, सत्य, सेवा प्रतीक,
ज्ञान की ज्योति जलाए।
वह मृदुभाषी, करुणामय हृदय,
भारत माता के सच्चे सपूत।
संस्कृत,अंग्रेजी हिंदी में दक्षता ,
वह हिंदी भाषा के अग्रदूत।
कभी नहीं रहा दंभ जीवन में,
न किया राजनीति में छल।
चरित्र, सादगी आभूषण उनके,
राष्ट्र निर्माण प्रतिबद्ध हर पल।
मालवीय जी के चिंतन से ,
भारत को मिली नई पहचान।
फलित हुई साधना महामना की,
दिया संस्कृति को सम्मान।
महामना तुम्हारे चरणों में ,
देश करता सादर आभार।
भारत रत्न से हैं सम्मानित,
नतमस्तक है सारा संसार।



