साहित्य

श्रद्धेय पंडित मदन मोहन मालवीय जी

आचार्य पंडित धर्मानंद त्रिपाठी गुरु 

विश्व पटल पर प्रखर विवेक के स्वामी
श्री मालवीय मदन।
केवल निज बल विवेक से
किया निर्मित शुभ ज्ञान भवन।।
लेखन वाचन न्यायालय में
जय दिलवाई भारतीय को।
अंधकार से प्रकाश में
ले आए भारतीय को।।
बिना सहारे दलबल संघ के
चमके तारे को नमन करो
मानव जो महा मानव बन।
उन चरणों में नमन करो।।
हे महामना मालवीय मदन मोहन
शत शत। नमन तुम्हे।
विश्व पटल की विश्वात्मा
भारतीयता का नमन तुम्हें।।
मानव नहीं है कोई।
तुलना हो जिससे आपकी
महामना या महामानव।
पदवी है केवल आपकी
—————————-

 

आचार्य पंडित धर्मानंद त्रिपाठी गुरु

कास्ट सराय नगीना बिजनौर उत्तर प्रदेश।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!