
1/
राजनीति को नीति मिली, जब उनका सम्मान था,
शब्द–शब्द में राष्ट्र बसा, ऐसा उनका मान था।
/2
विरोधी भी नतमस्तक थे, ऐसा उनका ज्ञान था,
सत्य, अहिंसा, राष्ट्रधर्म, देश की वो पहचान था।
/3
कविता में संवेदना, भाषण में तूफ़ान था,
शांत स्वभाव के भीतर भी, अदम्य सा बलवान था।
/4
कटु समय में भी मुस्काए, धैर्य जिनकी शान था,
संघर्षों से तपकर निकला, उनका व्यक्तित्व महान था।
/5
दल से ऊपर देश रखा, यही तो उनका प्रण था,
राजधर्म की मिसाल बने, ऐसा उनका मन था।
/6
कठिन राह पर चलते-चलते, हुआ न विचलित ध्यान था,
लोकतंत्र के प्रहरी बनना, उनका ही अरमान था।
7/
भारत को वैश्विक मंचों पर, दिलवाया सम्मान था,
शांति, विकास और संवाद जिनका ये अभियान था।
8/युग-युग तक स्मरण रहेगा, उनका योगदान था
शत्रु भी आदर करें ऐसा उनका स्थान था।
*रचनाकार*
*डॉ मंजु जौहरी मधुर*
*नजीबाबाद जिला बिजनौर*
*मौलिक एवं अप्रकाशित*



