
पच्चीस दिसंबर ने इतिहास को स्वर दिया,
भारत को अटल सा नेतृत्व का वर दिया।
ग्वालियर की मिट्टी धन्य हुई उस दिन,
युग ने जब अपने पुरुषोत्तम को जन्म दिया।
रहकर सत्ता में भी साधना का पथ अपनाया,
रहकर विपक्ष में भी मर्यादा का दीप जलाया।
निज जीवन को राष्ट्र पर अर्पित कर दिया,
रहकर कुंवारा भारत को परिवार बनाया।
पोखरण की रेत ने जब हुंकार लिख डाली,
परमाणु शक्ति बनी आत्मसम्मान की लाली।
दुनिया ने जाना भारत मौन नहीं कमजोर,
शांति की भाषा में भी थी शक्ति निराली।
चोटियों पर कारगिल की संकट जब आया,
वीरों के साहस ने इतिहास रचाया।
अटल संकल्प के साथ बढ़ा भारत आगे,
दुश्मन ने शीश झुकाया, विजय तिरंगा लहराया।
संयुक्त राष्ट्र में हिंदी जब गूँज उठी,
पहचान भारत की नई ऊँचाइयों से जुड़ी।
शब्द नहीं थे, स्वाभिमान की थी पुकार,
विश्व ने देखा भारत की आत्मा खड़ी।
अटल थे विचार, अटल जी के निर्णय में,
आँधी भी डिगा न सकी उनके संयम में।
बनाकर भारत रत्न इतिहास ने कह दिया,
अटल बिहारी अमर हैं भारत के कण-कण में।
जो झुका नहीं तूफानों में, वो नाम अटल कहलाया,
शब्द बने शस्त्र जहाँ, भारत का मान बढ़ाया।
पोखरण से कारगिल तक गूंजा भारत का स्वर
कह दो मंच से जोर से… अटल अमर है, भारत अटल कहलाया!
दिनेश पाल सिंह दिलकश
जनपद संभल उत्तर प्रदेश




