
जोरावर सिंह व फतेह सिंह थे गुरु गोविंद सिंह संतान।
भारत माँ की बलि बेदी पर, दोनों होते हैं कुर्बान।।
सरहिंद मुगल शासक की थी, चाहत इस्लाम कबूल।
बहुत यातना दी बच्चों को,पर वे बदले नहीं वसूल।।
दीवारों में जिंदा चुनवाए,मुगल किए थे अत्याचार।
धर्म ध्वजा फहराई सिंह ने, बलिदानी पूरा परिवार।।
ऋणी सभी है भारतवासी बलिदान दिवस का है मान।
झुके नहीं मुगलों के आगे, अलग बनी उनकी पहचान।।
आन बान वो शान देश की, बचा लिए थे अपना धर्म।
भारत मांँ पर गर्व उन्हें था,राष्ट्रहितैषी उनका कर्म।।
सन दो हजार बाईस रहा, छब्बीस दिसंबर तारीख।
बाल बलिदान दिवस मनाने, हेतु सभी ने मिल दी सीख।।
दोनों बच्चों के जीवन की, क्रूरों ने ली इस दिन जान।
हिंदुस्तान नहीं भूलेगा, युगों युगों तक यह बलिदान।।
श्रद्धा सुमन समर्पित करती, बच्चों का अद्भुत था त्याग।
उनके प्रति देशवासियों का, कभी न कम होगा अनुराग।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश




