
(मनहरण घनाक्षरी)
देश खूब मना रहा,
यश गान छाय रहा,
भारत के अटल जी,
पूर्व प्रधानमंत्री।
संयुक्त राष्ट्र सभा में,
हिंदी का बढाया मान,
गए जब भारत से,
बन विदेश मंत्री।
कवि और पत्रकार,
किये जन उपकार,
आजीवन भारत के,
रहे बन सन्तरी।
प्रखर प्रबुद्धिवान,
किये नहीं अभिमान,
परमाणु देश युक्त,
घोषित हुई कंट्री।
कृष्ण कान्त मिश्र
स्वरचित मौलिक




