साहित्य

इम्तिहान की घड़ी

नरेश चन्द्र उनियाल

“इम्तिहान की घड़ी”

कदम न रुकने पाएँ चाहे,
पग पग उलझन नई खड़ी है,
तेरे दृढ निश्चय के आगे
कोई बाधा नहीं बड़ी है।

विपदा होती है दो पल की,
धैर्य विपद में धारण कर लो,
सब पहला सा हो जायेगा,
इम्तिहान की यही घड़ी है।

करते हैं जो कठिन परिश्रम,
पास परीक्षा वे ही होते,
तेरी सफलता कहे चीखकर,
तेरी मेहनत बहुत कड़ी है।

हिम्मत अपनी कभी न खोना,
यह ही तेरी मदद करेगी,
बढ़ राहों में लिए हौसला,
सम्मुख स्वप्निल जीत ख़डी है।

नरेश चन्द्र उनियाल,
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।

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