
कितनी अद्भुत तारीख़ आज है,
वर्ष और माह का अंतिम दिन है,
कल वर्ष, माह का प्रथम दिन है,
नव वर्ष का नव शुभारंभ है।
लीजिये नववर्ष की हार्दिक बधाई,
मन की भावना ने ली अंगड़ाई,
जो शक्ति प्रेम स्नेह में होती है,
नफ़रत में तो बस होती है जुदाई।
नव वर्ष आये ढेरों ख़ुशियाँ लेकर,
ज्ञान विज्ञान खेत, खलिहान
तक,
प्रगति का यह सुंदर सिलसिला,
फैले भारतवर्ष के जन जन तक।
आदित्य सुख समृद्धि वैभव बढ़े,
प्रभू की सद्कृपा हम सबको मिले,
हिंसा अहिंसा स्वरूप धारण करे,
इंसान इंसान बीच इंसानियत बढ़े।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’




