
मैं नया साल हूँ, मेरा स्वागत करो,
मेरी बातों पे नजरें इनायत करो
पलको बिछा मेरा सजदा करो,
पर न मुझसे नई कोई चाहत करो।।
मेरे आने से कुछ न बदल पाएगा,
बस कलेंडर तुम्हारा बदल जाएगा,
बीते सालों से तुम न शिकायत करो
जो भी सिखा है उसकी हिमायत करो।।
मैं समय नापने का तरीका सा हूँ
धरती के घूमने का सलीका सा हूँ
मेरे आने पे फिर कोई दावत करो,
दोस्त बन के रहो न अदावत करो।।
डूबते के लिए, एक नौका सा हूँ,
मैं वादा नहीं, एक मौका सा हूँ,
सोचो पहले, फिर ही इरादत करो,
छोटे संकल्प लो,ये रवायत करो।।
ओढ़ आलस खुद को सोने न दो,
हर सुबह को बेकार होने न दो।
यों रिश्तों की थोड़ी हिफ़ाज़त करो,
मोबाइल से थोड़ी बगावत करो।
न ग़म में रहो, न घमंड में बहो,
अन्याय को यारों तुम न सहो,
हर पल की मेरी तुम हिफ़ाज़त करो,
पड़े झुकना न—ऐसी शरारत करो।।
कुछ तुम्हारे लिए मैं न कर पाऊंगा,
मैं आऊंगा आ कर गुजर जाऊंगा,
डुबो चिट्टे में न ये हिमाकत करो,
छूटे आदत बुरी ये इबादत करो।।
अतुल कुमार
गड़खल
जिला सोलन।।




