मानव मे मानवता लाईजा अब
एक दुसरा के अपमान मत करी।
मार शब्दान के बाण से अपने ही
रिस्तेदारन के लहूलुहान मत करी
रात भईल बा त भोर होई बे करी
आई बसन्त त फूल खिलबे करी।
देह माटी के ह माटी मे मिल जाई
ए ही से ई धन के गुमान मत करी
जेतना गम खाए के बा ओतना खाइ, बाकी जियान मत करी
गम के आंसू बहा के दुबारा
ओके ख्याल मत करी।।
जे आपन बा ओके
भुलाए के कोशिश मत करी
दिल से दिल मिलाके रखी
दिल तोड़े के ख्याल मत करी।।
प्रकृति के बनावल वस्तु से
छेड़ छाड़ मत करिए
कोशिश करी देख भाल करे के
ऊ हो जीव ह परेशान मत करी
मुन्ना प्रसाद
रोहतास बिहार



