
नया साल आते ही
काम में नहीं जुटुंगा ,
अलार्म चार बजे का लगा कर
दस बजे सो कर उठूंगा।।
पत्नी जितने भी ताने मारे
घर पर मैं अपनी ही चलाऊंगा,
कपड़े धो कर,बर्तन मांज कर
ही बाजार से सब्जी लेने जाऊंगा।।
पड़ोसी से संबंधों में
तनिक भी अंतर नहीं लाऊंगा,
उससे से लिया उधार
इस साल भी न लौटाऊंगा।।
सच्चे मित्र का धर्म
मैं इस साल भी निभाऊंगा,
कैंटीन में उनके साथ चाय पियूंगा
बिल देने के समय, खिसक जाऊंगा।।
कवि सम्मेलन में बढ़ चढ़ कर
कविता सुनाऊंगा,
जब दूसरा सुनाने लगेगा
खिसक जाऊंगा।।
अतुल कुमार
गड़खल
जिला सोलन।।




