साहित्य

नया साल हो मय मंगल

अनिता मंदिलवार 'सपना'

नव वर्ष में करो नई पहल
कठिन जिंदगी हो सरल
अनसुलझी पहेलियाँ
उसको कर सको हल
वक्त देखकर चलता जो
आगे जाकर होता सफल
नव वर्ष का उगता सूरज
लाए अब सुनहरा पल
समय के साथ चलना सीखो
आगे हो ऐसी हलचल
सुख के चौक पूरे हर द्वार
सुखमय घर आंगन का हो पल
सभी के लिए सपना कहती
नया साल हो मय मंगल

अनिता मंदिलवार ‘सपना’
अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़

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