
आ जाऊँगा मुझको बुलाने की ज़रूरत क्या है,
हुस्न जादू है चाँद को तकने की ज़रूरत क्या है?
जाने कौन सा पल था तू मेरी रूह में उतर गई,
हुआ मदहोश,होश में लाने की ज़रूरत क्या है?
तेरे जिस्म की खुशबू घुलने लगी है साँसों में,
खुश्बू अब मुझको लगाने की जरूरत क्या है।
ग़ज़लों के इन्ही अल्फ़ाज़ों में छुपी है मुहब्बत ,
रिश्ता ज़माने को बताने की ज़रूरत क्या है?
दिलों के इख़्तेलाफ़ सबको पता हो गए “मुस्ताक़”,
आंगन अब ये दीवार उठाने की ज़रूरत क्या है?




